उर्दू शायरी · ग़ज़ल

gham ke baadal agar chhaTe hue the

ग़म के बादल अगर छटे हुए थे

غم کے بادل اگر چھٹے ہوئے تھے

शायर: Aarif Nazeer7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ग़म के बादल अगर छटे हुए थे
बाल मिट्टी में क्यों अटे हुए थे

शा'इरी दोस्त रंज घर दफ़्तर
कितने हिस्सों में हम बटे हुए थे

मैं 'अलम-दार था 'अलम थामा
चाहे बाज़ू मिरे कटे हुए थे

सारा मंज़र हमारा मंज़र था
और मंज़र से हम हटे हुए थे

'मीर' साहिब का था शग़फ़ उस को
शे'र हम ने भी सब रटे हुए थे

जान-लेवा उसूल थे यारम
जिन पे हम बे-सबब डटे हुए थे

जो क़दामत-परस्त थे 'आरिफ़'
अपने किरदार में घटे हुए थे