उर्दू शायरी · ग़ज़ल

gham diya hai to siwa hausla-e-gham dena

ग़म दिया है तो सिवा हौसला-ए-ग़म देना

غم دیا ہے تو سوا حوصلۂ غم دینا

शायर: Aabid Jafri4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ग़म दिया है तो सिवा हौसला-ए-ग़म देना
ये तो इक आग है फिर क्या इसे शबनम देना

अब भी सोई हुई रातों की थकन बाक़ी है
ख़्वाब देना हों ज़रूरी तो ज़रा कम देना

वक़्त से ही मुझे उम्मीद मसीहाई की थी
वक़्त ही भूल गया ज़ख़्म को मरहम देना

उस ने ता'बीर के सब भेद छुपाए हम से
जिस ने सीखा है हमें ख़्वाब का आलम देना