उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek taraf halwai tha

एक तरफ़ हलवाई था

ایک طرف حلوائی تھا

शायर: Zafar Iqbal7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

एक तरफ़ हलवाई था
दूसरी तरफ़ नाई था

छाए हुए तुम थे कहीं
कहीं तुम्हारा भाई था

कंजूसों का बादशाह
कैसा हातिम-ताई था

दिल के तर्के में मिरा
हिस्सा एक तिहाई था

सहरा है अब जिस जगह
ये ख़ित्ता दरियाई था

हम भी थे दिल-फेंक से
वो भी इक हरजाई था

छोड़ के रुस्वा हूँ 'ज़फ़र'
पेशा जो आबाई था