उर्दू शायरी · ग़ज़ल

duniya ka chalan tark kiya bhi nahin jata

दुनिया का चलन तर्क किया भी नहीं जाता

دنیا کا چلن ترک کیا بھی نہیں جاتا

शायर: Yagana Changezi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दुनिया का चलन तर्क किया भी नहीं जाता
इस जादा-ए-बातिल से फिरा भी नहीं जाता

ज़िंदान-ए-मुसीबत से कोई निकले तो क्यूँकर
रुस्वा सर-ए-बाज़ार हुआ भी नहीं जाता

दिल बाद-ए-फ़ना भी है गिराँ-बार-ए-अमानत
दुनिया से सुबुक-दोश उठा भी नहीं जाता

क्यूँ आने लगे शाहिद-ए-इस्मत सर-ए-बाज़ार
क्या ख़ाक के पर्दे में छुपा भी नहीं जाता

इक मअ'नी-ए-बे-लफ़्ज़ है अंदेशा-ए-फ़र्दा
जैसे ख़त-ए-क़िस्मत कि पढ़ा भी नहीं जाता