उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dua mange dil-e-gham-gin kahan tak

दुआ माँगे दिल-ए-ग़म-गीं कहाँ तक

دعا مانگے دل غمگیں کہاں تک

शायर: Dagh Dehlvi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दुआ माँगे दिल-ए-ग़म-गीं कहाँ तक
कहूँ मैं दम-ब-दम आमीं कहाँ तक

तिरे बीमार को आती नहीं मौत
पढ़े जाए कोई यासीं कहाँ तक

तड़पने दो अभी मैं भी तो देखूँ
वो देते हैं मुझे तस्कीं कहाँ तक

ख़ुदा उस बुत की बातों का है मुश्ताक़
गया शोर-ए-लब-ए-शीरीं कहाँ तक

मिरा मुँह थक गया शुक्र-ए-जफ़ा से
करूँ मैं आफ़रीं तहसीं कहाँ तक