उर्दू शायरी · ग़ज़ल

din mahina sal behtar ho gaya

दिन महीना साल बेहतर हो गया

دن مہینہ سال بہتر ہو گیا

शायर: G R Kanwal5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिन महीना साल बेहतर हो गया
रफ़्ता रफ़्ता हाल बेहतर हो गया

ज़िंदगी का ऊँचा नीचा रास्ता
जब हुआ पामाल बेहतर हो गया

छू लिया जिस को नए सय्याद ने
वो पुराना जाल बेहतर हो गया

कर लिए जिस दिन क़ुबूल अपने गुनाह
नामा-ए-आमाल बेहतर हो गया

आ गया जब ख़ूबसूरत हाथ में
था जो बद-तर माल बेहतर हो गया