उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil se kah aahen na har aan bhare

दिल से कह आहें न हर आन भरे

دل سے کہہ آہیں نہ ہر آن بھرے

शायर: Pandit Daya Shankar Naseem Lakhnawi8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल से कह आहें न हर आन भरे
कुछ जिगर हो तो दम इंसान भरे

ख़्वाहिशों को मैं करूँ क्या ऐ सब्र
घर में मुफ़्लिस के हैं अरमान भरे

हम तो मिज़्गाँ की नमत हम-चश्मों
ख़ाली हाथ आए हैं अरमान भरे

अश्क दाना है तो नज़रों से न गिर
दामन इस धब्बे से नादान भरे

ज़ब्त रोके न तो दिखलाऊँ आँख
पल में पानी अभी तूफ़ान भरे

चश्म-ए-उश्शाक़ के बर रो मत आ
ऐ सदफ़ दुर ने तिरे कान भरे

गर वो बुत नाम-ए-ख़ुदा गोया हो
कलिमा का दम न मुसलमान भरे

फ़ौज अल्फ़ाज़ की भरती है 'नसीम'
शे'र पर कुन से हैं दीवान भरे