उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil se har dam hamein aawaz laga aati hai

दिल से हर दम हमें आवाज़ लगा आती है

دل سے ہر دم ہمیں آواز لگا آتی ہے

शायर: Pandit Daya Shankar Naseem Lakhnawi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल से हर दम हमें आवाज़ लगा आती है
बंद कानों को भी गिर्ये की सदा आती है

दिल से है आँख तक आई असर-ए-गर्मी-ए-शौक़
अश्क-ए-हसरत से निगह आबला-पा आती है

गुल हुआ कोई चराग़-ए-सहरी ओ बुलबुल
हाथ मलती हुई पत्तों से सबा आती है

तेरी आँखों का हूँ बीमार मैं ओ ईसा-दम
न दुआ आती है मुझ को न दवा आती है

आइना साफ़ सिकंदर को दिखाया तू ने
ख़ूब ऐ ख़िज़्र तुझे राह बना आती है

छू लिया धोके से दामान-ए-सबा तू ने तो क्या
ग़ुंचा-ए-गुल कहीं मुट्ठी में हवा आती है

जिस क़दर वस्ल-ए-बुताँ का तुम्हें रहता है फ़िराक़
ऐ 'नसीम' इतनी कभी याद-ए-ख़ुदा आती है