उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil pur-awaz hai zaban KHamosh

दिल पुर-आवाज़ है ज़बाँ ख़ामोश

دل پر آواز ہے زباں خاموش

शायर: Zaheen Shah Taji8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इस शीर्षक की यह संग्रह प्रविष्टि 1 है। समान शीर्षक के रिकॉर्ड में पाठ या श्रेय का अंतर है; इसे स्वतंत्र आधिकारिक संस्करण का दावा न मानें। अन्य संग्रह प्रविष्टि 1

दिल पुर-आवाज़ है ज़बाँ ख़ामोश
गोश-ए-दिल के लिए सुकूत ख़रोश

लर्ज़िश-ए-बादा है ये साग़र में
या वो महव-ए-ख़िराम ज़ुल्फ़-ब-दोश

पास के पास और दूर के दूर
दिल में मौजूद आँख से रू-पोश

क्याँ उड़े होश जब नक़ाब उड़े
क्या है तेरा हिजाब मेरा होश

हुस्न भी मस्त 'इश्क़ भी सरशार
देखिए किस को आए पहले होश

चाँद निकला है सोगवाराना
शब-ए-ग़म चाँदनी उदास ख़मोश

क्या गुलिस्ताँ में आग बरसी है
ग़ुंचा-ओ-गुल तमाम शो'ला-पोश

लाख बार आज़मा चुका हूँ 'ज़हीन'
दिल की आवाज़ है नवा-ए-सरोश