उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bahaar-e-bagh-e-gulistan-e-sarmadi hum hain

बहार-ए-बाग़-ए-गुलिस्तान-ए-सरमदी हम हैं

بہار باغ گلستان سرمدی ہم ہیں

शायर: Zaheen Shah Taji8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बहार-ए-बाग़-ए-गुलिस्तान-ए-सरमदी हम हैं
ख़ुदा के साथ हैं दाइम वो आदमी हम हैं

वो बे-ख़ुदी कि हक़ीक़त में है ख़ुदी हम हैं
नयाज़-ए-बंदगी-ओ-नाज़-ए-ख़्वाजगी हम हैं

जिस अंजुमन में दिलों के चराग़ जलते हैं
उस अंजुमन में चराग़ों की रौशनी हम हैं

मिसाल-ए-बर्क़-ए-तमन्ना ब-रंग-ए-आतिश-ए-शौक़
ये आग जो है दिलों में लगी हुई हम हैं

है एक आँख में सूरज तो एक आँख में चाँद
तग़य्युरात-ए-शब-ओ-रोज़ से बरी हम हैं

ख़जिल है नूर-ए-मोहब्बत से ज़ुल्मत-ए-नफ़रत
जो शम' तुंद हवा न बुझा सकी हम हैं

ये वाक़ि'आ है कि सब कुछ है तू ही तू ऐ दोस्त
ये और बात कि जो कुछ है तू वही हम हैं

बहुत बड़े हैं हक़ीक़त में हम 'ज़हीन' मगर
रह-ए-मजाज़ में सब से बड़ी कमी हम हैं