उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chaman-taraaz bahaaron mein bhi sukun na mila

चमन-तराज़ बहारों में भी सुकूँ न मिला

چمن طراز بہاروں میں بھی سکوں نہ ملا

शायर: Zaheen Shah Taji6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चमन-तराज़ बहारों में भी सुकूँ न मिला
मगर गुलों से वो रुख़्सार-ए-लाला-गूँ न मिला

इसी सबब से जुनूँ को ख़िरद समझ न सकी
जहान में जिसे हिकमत मिली जुनूँ न मिला

चटक गुलों की सदा-ए-शिकस्त-ए-दिल से मिली
मगर गुलों का दिल-ए-ख़ूँ-शुदा से ख़ूँ न मिला

ज़बाँ पे 'अहद-ए-वफ़ा है नज़र में 'अज़्म-ए-जफ़ा
मजाज़ अपनी हक़ीक़त से आह क्यों न मिला

मजाज़ ‘ऐन-ए-हक़ीक़त मिरी निगाह में है
तिरी निगाह से तेरा बयान क्यों न मिला

मुझे ये किस ने फ़रेब-ए-सुकूँ दिया है 'ज़हीन'
अगर सुकूँ न मिले तो न कह सकूँ न मिला