उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bahut barsi ghaTa chhane se pahle

बहुत बरसी घटा छाने से पहले

بہت برسی گھٹا چھانے سے پہلے

शायर: Zaheen Shah Taji9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बहुत बरसी घटा छाने से पहले
वो आए हैं ख़याल आने से पहले

तग़ाफ़ुल-केश मैं ने तुम को समझा
मगर दीवाना बन जाने से पहले

मक़ाम-ए-दिल मुक़द्दम है नज़र पर
दिल आया है नज़र आने से पहले

ज़रा सुलझाएँ दिल की उलझनों को
वो अपनी ज़ुल्फ़ सुलझाने से पहले

कब आती है क़यामत मैं बताऊँ
तिरे जाने के बा'द आने से पहले

बहारें मुस्कुराती हैं ख़िज़ाँ में
खिले हैं फूल मुरझाने से पहले

हँसी की झलकियाँ हैं आँसुओं में
वो ख़ुद आते थे याद आने से पहले

नक़ाब आया न आए उन के रुख़ पर
हमारे होश में आने से पहले

'ज़हीन' उस की हक़ीक़त जिस ने समझी
न समझी मेरे अफ़्साने से पहले