उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil mein hai ittifaq se dasht bhi ghar ke sath sath

दिल में है इत्तिफ़ाक़ से दश्त भी घर के साथ साथ

دل میں ہے اتفاق سے دشت بھی گھر کے ساتھ ساتھ

शायर: Idris Babar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल में है इत्तिफ़ाक़ से दश्त भी घर के साथ साथ
इस में क़याम भी करें आप सफ़र के साथ साथ

दर्द का दिल का शाम का बज़्म का मय का जाम का
रंग बदल बदल गया एक नज़र के साथ साथ

ख़्वाब उड़ा दिए गए पेड़ गिरा दिए गए
दोनों भुला दिए गए एक ख़बर के साथ साथ

शाख़ से इस किताब तक ख़ाक से ले के ख़्वाब तक
जाएगा दिल कहाँ तलक उस गुल-ए-तर के साथ साथ

आज तो जैसे दिन के साथ दिल भी ग़ुरूब हो गया
शाम की चाय भी गई मौत के डर के साथ साथ

इस को ग़ज़ल समझ के ही सरसरी देखिए सही
ये मिरा हाल-ए-दिल भी है अर्ज़-ए-हुनर के साथ साथ