उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil mein hai gham-o-ranj-o-alam hirs-o-hawa band

दिल में है ग़म-ओ-रंज-ओ-अलम हिर्स-ओ-हवा बंद

دل میں ہے غم و رنج و الم حرص و ہوا بند

शायर: Dagh Dehlvi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल में है ग़म-ओ-रंज-ओ-अलम हिर्स-ओ-हवा बंद
दुनिया में मुख़म्मस का हमारे न खुला बंद

हम दाम में फँसते ही हुए आशिक़-ए-सय्याद
ये और भी इक बंद पे मज़बूत लगा बंद

ऐ हज़रत-ए-दिल जाइए मेरा भी ख़ुदा है
बे आप के रहने का नहीं काम मिरा बंद

ऐ मोहतसिब इक दम से तिरी कितनी जफ़ाएँ
शीशे का है दम बंद सुराही का गला बंद

दम रुकते ही सीने से निकल पड़ते हैं आँसू
बारिश की अलामत है जो होती है हवा बंद

कहते थे हम ऐ 'दाग़' वो कूचा है ख़तरनाक
छुप छुप के मगर आप का जाना न हुआ बंद