उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil le chala hai bandh ke dilbar ke ru-ba-ru

दिल ले चला है बाँध के दिलबर के रू-ब-रू

دل لے چلا ہے باندھ کے دل بر کے روبرو

शायर: Dagh Dehlvi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल ले चला है बाँध के दिलबर के रू-ब-रू
जाता है इक असीर सितमगर के रू-ब-रू

उस बुत में इक ख़ुदाई का जल्वा है वर्ना शैख़
सज्दे किए से फ़ाएदा पत्थर के रू-ब-रू

आँसू बहा रहा हूँ ख़त-ए-यार पढ़ के मैं
यूँ दाना डालता हूँ कबूतर के रू-ब-रू

हासिल हुई भी अक़्ल-ए-फ़लातूँ अगर तो क्या
चलती नहीं किसी की मुक़द्दर के रू-ब-रू

ऐ 'दाग़' होगा हम से किसी का जवाब क्या
मिक़दार-ए-चश्म क्या है समुंदर के रू-ब-रू