उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil koi aaina nahin TuT ke rah gaya to phir

दिल कोई आईना नहीं टूट के रह गया तो फिर

دل کوئی آئینہ نہیں ٹوٹ کے رہ گیا تو پھر

शायर: Idris Babar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल कोई आईना नहीं टूट के रह गया तो फिर
ठीक ही कह रहे हो तुम ठीक न हो सका तो फिर

उस को भुलाने लग गए इस में ज़माने लग गए
ब'अद में याद आ गया वो कोई और था तो फिर

फूल है जो किताब में अस्ल है कि ख़्वाब है
उस ने इस इज़्तिराब में कुछ न पढ़ा लिखा तो फिर

रास्ते अजनबी से थे पेड़ थे सो किसी के थे
ये कोई सोचता तो क्यूँ और कोई सोचता तो फिर

अब उसे ख़्वाब जान के सो रहो लम्बी तान के
याद न आ सका तो क्या याद भी आ गया तो फिर