उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil ki taKHti se miTaya hua tu

दिल की तख़्ती से मिटाया हुआ तू

دل کی تختی سے مٹایا ہوا تو

शायर: Zafar Iqbal8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल की तख़्ती से मिटाया हुआ तू
याद आता है भुलाया हुआ तू

रौशनी रहती है तेरी शब भर
जलता रहता है बुझाया हुआ तू

मैं कहीं और तुझे ढूँढता हूँ
है कहीं और छुपाया हुआ तू

मेरे दिल से न बर-आमद हो जाए
इतनी मेहनत से चुराया हुआ तू

ख़र्च करता हूँ किफ़ायत से तुझे
काम आएगा बचाया हुआ तू

फिर वही सामने आ जाता है
मेरे रस्ते से मिटाया हुआ तू

रंग है कोई हमेशा के लिए
मेरे चेहरे से उड़ाया हुआ तू

चाहता कुछ भी नहीं तुझ से 'ज़फ़र'
किस तकब्बुर में है आया हुआ तू