उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil ke ghuTne ko ishaara samjho

दिल के घुटने को इशारा समझो

دل کے گھٹنے کو اشارا سمجھو

शायर: Idris Babar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल के घुटने को इशारा समझो
दहर ये अपना ख़सारा समझो

ये भी मुमकिन है कि तुम दूर के लोग
इस अलाव को सितारा समझो

ये भी इक मौज है मिट्टी की सही
वक़्त कम है तो किनारा समझो

पर नहीं होते ख़यालों के तो फिर
कैसे उड़ते हैं ग़ुबारा समझो

किसे मालूम ख़ज़ाना मिल जाए
कोई नक़्शा तो दोबारा समझो

खेत रुल जाएँगे पागल-पन में
जंग कैसी मुझे हारा समझो