उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil ke ehsasat mein jis din kami ho jaegi

दिल के एहसासात में जिस दिन कमी हो जाएगी

دل کے احساسات میں جس دن کمی ہو جائے گی

शायर: Jaleel Qidwai12 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल के एहसासात में जिस दिन कमी हो जाएगी
देखना बे-लुत्फ़ उस दिन ज़िंदगी हो जाएगी

गर कभी उस की निगाह-ए-दिल-बरी हो जाएगी
इस तन-ए-बे-जाँ में रक़्साँ ज़िंदगी हो जाएगी

बढ़ते बढ़ते दर्द-ए-दिल हो जाएगा वज्ह-ए-सुकूँ
रफ़्ता-रफ़्ता सोज़-ए-पिन्हाँ में कमी हो जाएगी

चारागर अफ़्साना-ए-बर्बादी-ए-उल्फ़त न पूछ
मुज़्तरिब सीने में रूह-ए-'आशिक़ी हो जाएगी

उस के लब पर देख लेंगे जब तबस्सुम की बहार
जोश-ज़न रग रग में मौज-ए-सरख़ुशी हो जाएगी

तुम दिखाओ तो सही नज़्ज़ारा-ए-हुस्न-ओ-जमाल
दीदा-ए-बेनूर में ख़ुद रौशनी हो जाएगी

ये दिल-ए-मायूस और तेरी जफ़ाओं से गुरेज़
ख़ौफ़ इतना है मिरी दिल-बस्तगी हो जाएगी

सुनने वाले देख उस की दिल-पज़ीरी पर न जा
ख़त्म इक दिन दास्तान-ए-ज़िंदगी हो जाएगी

चंद रोज़ा 'ऐश पर ग़ाफ़िल मिटा है किस लिए
साज़-ए-ग़म को छेड़ ये दुनिया नई हो जाएगी

ज़ौक़-ए-दिल के साथ हैं ये जल्वा-हा-ए-रंग-रंग
ये न हो तो सर्द बज़्म-ए-‘आशिक़ी हो जाएगी

अपनी 'अज़्मत से अगर इंसान वाक़िफ़ हो गया
सारी दुनिया परतव-ए-नक़्श-ए-ख़ुदी हो जाएगी

सोज़-ए-ग़म की गर यही हालत रही कुछ दिन 'जलील'
देखना ये जान नज़्र-ए-'आशिक़ी हो जाएगी