उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil ke aaghosh mein wo rahat-e-jaan rahta hai

दिल के आग़ोश में वो राहत-ए-जाँ रहता है

دل کے آغوش میں وہ راحت جاں رہتا ہے

शायर: Pandit Daya Shankar Naseem Lakhnawi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल के आग़ोश में वो राहत-ए-जाँ रहता है
बंदा ख़ानी में ख़ुदा-वन्द-ए-जहाँ रहता है

इश्क़ के आते ही सब जाते रहे होश-ओ-हवास
जानवर रहते नहीं शेर जहाँ रहता है

एक अक़्लीम में दो शाह नहीं रह सकते
इश्क़ जब आया लो आराम कहाँ रहता है

ढूँढिए दिल को तो कहते हैं वो ये सीना-सिपर
इक मिरे ख़ाना-ए-ज़ंजीर में यहाँ रहता है

गुज़रे ऐ पैक-ए-सबा तो ये दुआ कह देना
कूचा-ए-ज़ुल्फ़ में दिल नाम-ए-जवाँ रहता है