उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil ka aur haal mazafat ka kab achchha hai

दिल का और हाल मज़ाफ़ात का कब अच्छा है

دل کا اور حال مضافات کا کب اچھا ہے

शायर: Idris Babar7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल का और हाल मज़ाफ़ात का कब अच्छा है
पर तुझे देख के लगता है कि सब अच्छा है

एक तस्वीर में लगता है कि हम भी ख़ुश थे
एक आवाज़ से लगता है कि सब अच्छा है

मेरी दुनिया में कोई चीज़ ठिकाने पे नहीं
बस तुझे देख के लगता है कि सब अच्छा है

सोचने बैठें तो इस्लाह की सूरत ही नहीं
देखने में यही लगता है कि सब अच्छा है

ये क़तारें तेरे बीमार के दीदार की हैं
तू ने जब शोर मचा रखा था अब अच्छा है

कोई उस्ताद की इस्लाह की सूरत या-रब
इल्म बेहतर है न हज़रत का अदब अच्छा है

लोगों को आईना दिखलाएँ न पत्थर खाएँ
अर्शमीदस के लिए बाथ का टब अच्छा है