उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dekhne ko phul mein mashghul hai

देखने को फूल में मशग़ूल है

دیکھنے کو پھول میں مشغول ہے

शायर: Aarif Nazeer6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

देखने को फूल में मशग़ूल है
ख़ार दामन में हैं सर पे धूल है

एक तो लहजा तिरा है ना-रवा
उस पे तेरी बात ना-मा'क़ूल है

गिर्या-ओ-मातम है साहब ज़िंदगी
मुस्कुराना आदमी की भूल है

जाने वाले लोग कब के जा चुके
धूल है अब राह में बस धूल है

हैं ग़लत ये आप की ख़ुश-फ़हमियाँ
मुस्कुराना तो मिरा मा'मूल है

खा गईं उस को भी ये गुम-नामियाँ
छोड़िए 'आरिफ़' कहाँ मक़्बूल है