उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dekha nahin chand ne palaT kar

देखा नहीं चाँद ने पलट कर

دیکھا نہیں چاند نے پلٹ کر

शायर: Idris Babar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

देखा नहीं चाँद ने पलट कर
हम सो गए ख़्वाब से लिपट कर

अब दिल में वो सब कहाँ है देखो
बग़दाद कहानियों से हट कर

शायद ये शजर वही हो जिस पर
देखो तो ज़रा वरक़ उलट कर

इक ख़ौफ़-ज़दा सा शख़्स घर तक
पहुँचा कई रास्तों में बट कर

काग़ज़ पे वो नज़्म खिल उठी है
उग आया है फिर दरख़्त कट कर

'बाबर' ये परिंद थक गए थे
बैठे हैं जो ख़ाक पर सिमट कर