उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dastaras chhin jaegi aur naqsh-e-pa kho jaenge

दस्तरस छिन जाएगी और नक़्श-ए-पा खो जाएँगे

دسترس چھن جائے گی اور نقش پا کھو جائیں گے

शायर: Aamir Azher6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दस्तरस छिन जाएगी और नक़्श-ए-पा खो जाएँगे
हम वहाँ पर बैठे बैठे रेत के हो जाएँगे

कब से मरना चाहते हैं तुझ पे हम तेरी क़सम
जान से तो जा रहे हैं जान मर तो जाएँगे

वो नहीं समझेंगे लैला कौन है मैं कौन हूँ
बस ज़रा सहरा तरफ़ जाना है पूछो जाएँगे

इक कहानी सुनते सुनते इतना 'अर्सा हो गया
अब अगर वो दिख गया तो अंधे ही हो जाएँगे

ये जो तारों का फ़ुसूँ है टूटना है सुब्ह को
जब तिरी आँखों से हम भी टूट कर खो जाएँगे

आप अगर ख़ुद से मुख़ातिब हैं तो 'आमिर' ठीक है
आप की बातों को सुन कर लोग तो सो जाएँगे