उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dasht mein gulshan mein har ja ki hai teri justuju

दश्त में गुलशन में हर जा की है तेरी जुस्तुजू

دشت میں گلشن میں ہر جا کی ہے تیری جستجو

शायर: Jafar Abbas Safvi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दश्त में गुलशन में हर जा की है तेरी जुस्तुजू
अब कहाँ ले जा रहा है ऐ फ़रेब-ए-रंग-ओ-बू

आप इतना तो बता दें कब करम होगा हुज़ूर
कब मुरव्वत में बदल जाएगी ये नफ़रत की ख़ू

सादगी-ए-दिल पे अपनी रश्क आता है मुझे
इक वफ़ा ना-आश्ना से है वफ़ा की आरज़ू

इश्क़ की मंज़िल में लाखों कारवाँ गुम हो गए
रहरव-ए-राह-ए-मोहब्बत क्या करेंगे जुस्तुजू

रह गए हैं अब तो ले दे कर दिल-ए-बर्बाद में
हसरत-ए-दीदार का ग़म और तेरी आरज़ू

दे रही है अपने दामन की हवा बाद-ए-सहर
तेरी ज़ुल्फ़-ए-अम्बरीं है इक जहान-ए-रंग-ओ-बू

जब कभी साक़ी ने 'जाफ़र' अपनी नज़रें फेर लीं
मय-कदे में पी लिया है मैं ने अरमाँ का लहू