उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dard-e-dil hai na falsafa mere pas

दर्द-ए-दिल है न फ़ल्सफ़ा मिरे पास

درد دل ہے نہ فلسفہ مرے پاس

शायर: Aamir Azher10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दर्द-ए-दिल है न फ़ल्सफ़ा मिरे पास
दाल रोटी का मसअला मिरे पास

पास मेरे भी है तिरी ही दु'आ
काश होता तिरा ख़ुदा मिरे पास

आगही आ गई तो आ ही गई
अब नहीं कोई रास्ता मिरे पास

एक पल एक पल न रोक सका
वक़्त मेरा था कब मिरा मिरे पास

सुस्त रातों में जिस ने छोड़ा था
तेज़ बारिश में आ गया मिरे पास

तुम परी-ज़ाद हो मैं आदम हूँ
ऐसे बे-सुध न बैठना मिरे पास

वाक़ि'आ ये है तू जो आ न सका
तब से मैं भी न आ सका मिरे पास

मेरा ग़म भी है तेरे ग़म जैसा
है पर इस ग़म की इंतिहा मिरे पास

दर्द जाली हैं अश्क नक़ली हैं
एक है नींद की दवा मिरे पास

वक़्त का क्या क़ुसूर वक़्त था वो
तू भी 'आमिर' कहाँ रहा मिरे पास