उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dard baDh kar dawa na ho jae

दर्द बढ़ कर दवा न हो जाए

درد بڑھ کر دوا نہ ہو جائے

शायर: JaiKrishn Chaudhry Habeeb9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दर्द बढ़ कर दवा न हो जाए
ज़िंदगी बे-मज़ा न हो जाए

रोकता हूँ मिज़ा पे मैं आँसू
गिर के दिल की सदा न हो जाए

निगह-ए-इल्तिफ़ात के सदक़े
दिल की धड़कन सिवा न हो जाए

रोज़ मरता हूँ रोज़ जीता हूँ
तेरा वा'दा वफ़ा न हो जाए

आप से शिकवा ऐ मआ'ज़-अल्लाह
लब तक आ कर दुआ न हो जाए

वो किसी काम का नहीं जो दिल
दर्द से आश्ना न हो जाए

सीना अक्सर है सोज़ से ख़ाली
ज़ीस्त बे-मुद्दआ न हो जाए

उफ़ ये तहज़ीब-ए-नौ की ख़ूँ-ख़्वारी
ख़ून-ए-इंसाँ रवा न हो जाए

दिल-लगी दिल-लगी में देख 'हबीब'
इश्क़ की इब्तिदा न हो जाए