उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dar raha sab pe jo suKHanwar hai

दर रहा सब पे जो सुख़नवर है

در رہا سب پہ جو سخنور ہے

शायर: Pandit Daya Shankar Naseem Lakhnawi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दर रहा सब पे जो सुख़नवर है
शे'र तेग़-ए-ज़बाँ का जौहर है

बात अपनी ये सुन के कान में डाल
आबरू मिस्ल-ए-आब-ए-गौहर है

'इश्क़ बिन क्या किसी का दिल हो गुज़ार
मोम बे-आग देखे पत्थर है

दिल का देना सरासरी मत जान
जान पर खेलना सरासर है

क्या मुख़ालिफ़ है इस चमन की हवा
ख़ार देता है जो गुल-ए-तर है

नोक रख लो बरहना-पाई की
आबाद ख़ार-ए-दश्त नश्तर है

अब तो जाते हैं उस गुल में 'नसीम'
हो रहेगा जो कुछ मुक़द्दर है