उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chhoDta mujhko na bismil wo magar chhoD diya

छोड़ता मुझ को न बिस्मिल वो मगर छोड़ दिया

چھوڑتا مجھ کو نہ بسمل وہ مگر چھوڑ دیا

शायर: Dagh Dehlvi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

छोड़ता मुझ को न बिस्मिल वो मगर छोड़ दिया
सर पे एहसान रहे इस लिए सर छोड़ दिया

टुकड़े टुकड़े किया नासेह का गरेबाँ मैं ने
शुक्र है उस ने मिरा दामन-ए-तर छोड़ दिया

काम सब ख़ाना-ख़राबी के हुए हैं तुझ से
रहम खा कर तुझे ऐ दीदा-ए-तर छोड़ दिया

फिर कहाँ था न यहाँ था न वहाँ था वो शोख़
दामन उस का जो सर-ए-राहगुज़र छोड़ दिया

ले गई थी तिरे दीवाने को घर से वहशत
नहीं मा'लूम कि जंगल में किधर छोड़ दिया

'दाग़'-ए-वारफ़्ता-तबीअ'त का ठिकाना क्या है
ख़ाना-बर्बाद ने मुद्दत हुई घर छोड़ दिया