उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chhak gae hain aaj ek saghar se hum

छक गए हैं आज इक साग़र से हम

چھک گئے ہیں آج اک ساغر سے ہم

शायर: Dagh Dehlvi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

छक गए हैं आज इक साग़र से हम
हाथ धो बैठे मय-ए-कौसर से हम

बुत-कदे में जा के उस बुत का पता
पूछते फिरते हैं हर पत्थर से हम

क़स्द-ए-सहरा है दिल-ए-वीराँ के साथ
इक बयाबाँ ले चले हैं घर से हम

जब रग-ए-जाँ से कमी करता है ख़ून
छेड़ देते हैं उसे निश्तर से हम

किस क़दर कटती है राह-ए-शौक़ जल्द
तेज़ चलते हैं तिरे ख़ंजर से हम

क्या कहें किस से कहें किस के लिए
फिरते हैं चारों तरफ़ मुज़्तर से हम

वो सितमगर रू-ब-रू होगा तो 'दाग़'
क्या कहेंगे दावर-ए-महशर से हम