उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chehre pe intizar ki parchhaiyan milin

चेहरे पे इंतिज़ार की परछाइयाँ मिलीं

چہرے پہ انتظار کی پرچھائیاں ملیں

शायर: Qaisarul Jafri5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चेहरे पे इंतिज़ार की परछाइयाँ मिलीं
हम चुप थे उस के बा'द भी रुस्वाइयाँ मिलीं

आया न रास हम को समुंदर से भागना
साहिल के आस-पास भी गहराइयाँ मिलीं

बरसों के बा'द लौट के आए जो गाँव हम
वो चाँदनी मिली न वो अंगनाइयाँ मिलीं

पानी पे तैरती थी हमारी ग़ज़ल कभी
डूबे जो आँसुओं में तो गहराइयाँ मिलीं

'क़ैसर' मिरे नसीब के दिन बह गए कहाँ
पानी पे सिर्फ़ शाम की परछाइयाँ मिलीं