उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chaman mein gul ne kahin dawa-e-jamal kiya

चमन में गुल ने कहीं दा'वा-ए-जमाल किया

چمن میں گل نے کہیں دعوئے جمال کیا

शायर: Pandit Daya Shankar Naseem Lakhnawi3 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चमन में गुल ने कहीं दा'वा-ए-जमाल किया
जमाल-ए-यार ने मुँह उस का ख़ूब लाल किया

बहार-ए-रफ़्ता फिरी अब तिरे तमाशे को
चमन को युम्न क़दम ने तिरे निहाल किया

रही थी दम की कशाकश गले पे कुछ बाक़ी
वो तेग़-ए-यार ने झगड़ा है इंफ़िसाल किया