उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chandni har shab ko karti hai kinara chandni

चाँदनी हर शब को करती है किनारा चाँदनी

چاندنی ہر شب کو کرتی ہے کنارا چاندنی

शायर: Pandit Daya Shankar Naseem Lakhnawi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चाँदनी हर शब को करती है किनारा चाँदनी
तेरे ख़ातिर मुँह को दिखलाती है तारा चाँदनी

आज महताबी पे चढ़ता है वो बहर-ए-सैर-ए-माह
जानता हूँ कुछ तिरा चमका सितारा चाँदनी

बे-ज़रूरत ख़ुश नहीं आती जहाँ में कोई चीज़
फ़स्ल-ए-सरमा में नहीं होती गवारा चाँदनी

तू चढ़ा शब को जो महताबी पे बहर-ए-चश्म-ए-बद
आसमाँ से उतरे करने को उतारा चाँदनी

वस्ल की शब का समा आँखों में छाया है मिरे
माह-रू देखे न फिर वैसे दोबारा चाँदनी

रोते रोते डूबता है जब शब-ए-फ़ुर्क़त में दिल
जानता हूँ साफ़ दरिया का किनारा चाँदनी