उर्दू शायरी · ग़ज़ल

but ko but aur KHuda ko jo KHuda kahte hain

बुत को बुत और ख़ुदा को जो ख़ुदा कहते हैं

بت کو بت اور خدا کو جو خدا کہتے ہیں

शायर: Dagh Dehlvi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बुत को बुत और ख़ुदा को जो ख़ुदा कहते हैं
हम भी देखें तो उसे देख के क्या कहते हैं

जो भले हैं वो बुरों को भी भला कहते हैं
न बुरा सुनते हैं अच्छे न बुरा कहते हैं

बज़्म-ए-अहबाब-ओ-मय-ए-नाब विसाल-ए-मा'शूक़
अब किसी शय में नहीं जिस को मज़ा कहते हैं

मैं गुनहगार अगर इश्क़-ए-मजाज़ी है गुनाह
मैं ख़तावार अगर इस को ख़ता कहते हैं

पहले तो 'दाग़' की तारीफ़ हुआ करती थी
अब ख़ुदा जाने वो क्यों उस को बुरा कहते हैं