उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bin tere kya karun jahan le kar

बिन तिरे क्या करूँ जहाँ ले कर

بن ترے کیا کروں جہاں لے کر

शायर: Jaleel Manikpuri9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बिन तिरे क्या करूँ जहाँ ले कर
ये ज़मीं और ये आसमाँ ले कर

अश्क छलकाए बाल बिखराए
वो गए मेरी दास्ताँ ले कर

दो जहाँ की तलब से फ़ारिग़ हूँ
तेरा दर तेरा आस्ताँ ले कर

उड़ गए सब चमन को रह गए हम
चार तिनकों का आशियाँ ले कर

रंग-ए-महफ़िल तिरा बढ़ाने को
आए हम चश्म-ए-ख़ूँ-फ़िशाँ ले कर

सब गए पूछने मिज़ाज उन का
मैं गया अपनी दास्ताँ ले कर

सब फिरे ले के अपने यूसुफ़ को
मैं फिरा गर्द-ए-कारवाँ ले कर

सब उड़े ले के फूल गुलशन से
और हम अपना आशियाँ ले कर

मेरी तक़दीर क्या बताऊँ 'जलील'
जा रही है कहाँ कहाँ ले कर