उर्दू शायरी · ग़ज़ल

be-as aadmi hun

बे-आस आदमी हूँ

بے آس آدمی ہوں

शायर: Zafar Iqbal8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बे-आस आदमी हूँ
बकवास आदमी हूँ

लिक्खूँ न क्यों ज़ियादा
पच्चास आदमी हूँ

मैं अपने शह्र ही में
बनबास आदमी हूँ

अपने से दूर हो कर
उस पास आदमी हूँ

हारा हुआ किसी का
मैं टॉस आदमी हूँ

बेहिस तो हूँ मगर मैं
हस्सास आदमी हूँ

इक भूक हूँ सरापा
और प्यास आदमी हूँ

मुझ से डरो पुलिस का
मैं ख़ास आदमी हूँ