उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bazm se aaKHir-e-shab hai safar-e-jam-e-sharab

बज़्म से आख़िर-ए-शब है सफ़र-ए-जाम-ए-शराब

بزم سے آخر شب ہے سفر جام شراب

शायर: Dagh Dehlvi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बज़्म से आख़िर-ए-शब है सफ़र-ए-जाम-ए-शराब
शाम-ए-ग़ुर्बत हुई साक़ी सहर-ए-जाम-ए-शराब

मस्त-ओ-सरशार को सरशार सँभाले क्या ख़ाक
न थमी दस्त-ए-सुबू से कमर-ए-जाम-ए-शराब

कसरत-ए-मजमा-ए-अग़्यार से महरूम रहा
न हुआ बज़्म में मुझ तक गुज़र-ए-जाम-ए-शराब

मोहतसिब देगा जवाब अपने सितम का तू क्या
कल जो कौसर पे हुआ दाद-गर-ए-जाम-ए-शराब

ये भी ऐ मोहतसिब उस लाल परी का है असर
उड़ के पहुँची है जो तुझ तक ख़बर-ए-जाम-ए-शराब

बज़्म-ए-दुश्मन में रहे आप तो सूफ़ी बन कर
सुर्ख़ आँखों में कहाँ है असर-ए-जाम-ए-शराब

नहीं मा'लूम कि ऐ 'दाग़' है तू किस धुन में
न तलाश-ए-बुत-ए-मह-वश न सर-ए-जाम-ए-शराब