उर्दू शायरी · ग़ज़ल

samay se pahle bhale zindagi ki sham aae

समय से पहले भले ज़िंदगी की शाम आए

سمے سے پہلے بھلے زندگی کی شام آئے

शायर: Balmohan panday5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

समय से पहले भले ज़िंदगी की शाम आए
किसी तरह तो उदासी का घाव भर जाए

हम अब उदास नहीं सर-ब-सर उदासी हैं
हमें चराग़ नहीं रौशनी कहा जाए

जो शे'र समझे मुझे दाद-वाद देता रहे
गले लगाए जिसे ग़म समझ में आ जाए

किसी के हँसने से रौशन हुई थी बाद-ए-सबा
कोई उदास हुआ तो गुलाब मुरझाए

ये एक दुख जो दबा रह गया है आँखों में
वो एक मिस्रा जिसे शे'र कर नहीं पाए