उर्दू शायरी · ग़ज़ल

baiTha maghz na chaTa kar

बैठा मग़्ज़ न चाटा कर

بیٹھا مغز نہ چاٹا کر

शायर: Zafar Iqbal9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बैठा मग़्ज़ न चाटा कर
उठ और सैर-सपाटा कर

बात भी माना कर कोई
यूँही रो'ब न छाँटा कर

मतलब दोनों का है एक
घाटा खा या घाटा कर

नेफ़े से पिस्तौल निकाल
महफ़िल में सन्नाटा कर

आटे से रोटी पकवा
फिर रोटी को आटा कर

लम्बी तान के सो जा और
सिसकी को ख़र्राटा कर

मार भी खा हँसता भी जा
हाथ हिला और टाटा कर

हाथ बाँध पीछे की तरफ़
आगे अपना गाटा कर

आज़ादी अच्छी है 'ज़फ़र'
थोड़ी क़ैद भी काटा कर