उर्दू शायरी · ग़ज़ल

awwal to rahe dur wo nalon se hamare

अव्वल तो रहे दूर वो नालों से हमारे

اول تو رہے دور وہ نالوں سے ہمارے

शायर: Dagh Dehlvi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अव्वल तो रहे दूर वो नालों से हमारे
पास आए तो घबराए सवालों से हमारे

ये कहते हैं बुलबुल से वो गुल हाथ में ले कर
तू देख मला कर इसे गालों से हमारे

क्या बरहना-पा दश्त में लाखों भी न होंगे
काँटों को मगर छेड़ है छालों से हमारे

हर वक़्त नई धुन है हमें ताज़ा तसव्वुर
जाओगे कहाँ बच के ख़यालों से हमारे

कहती हैं वो आँखें सफ़-ए-मिज़्गाँ को बढ़ा कर
है कौन जो रू-कश हो रिसालों से हमारे

ऐ 'दाग़' फ़लक दुश्मन-ए-अरबाब-ए-हुनर है
ज़ालिम को ख़बर हो न कमालों से हमारे