उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aur un aankhon ne mere dil ki haalat zar ki

और उन आँखों ने मेरे दिल की हालत ज़ार की

اور ان آنکھوں نے میرے دل کی حالت زار کی

शायर: Jaleel Manikpuri9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

और उन आँखों ने मेरे दिल की हालत ज़ार की
हो नहीं सकती दवा बीमार से बीमार की

मोहर की उन पर ज़रूरत क्या है ऐ पीर-ए-मुग़ाँ
एक इक ख़म पर लगी है आँख हर मय-ख़्वार की

ख़ैर हो या-रब कहीं वो ख़ुद न बन जाएँ रक़ीब
आइने पर आज पड़ती हैं निगाहें प्यार की

ख़ून कर के दिल हमारा फिर गई वो मस्त आँख
एक ही चुल्लू में निय्यत भर गई मय-ख़्वार की

दीद के तालिब थे मूसा तूर को थी क्या ख़बर
फूँक कर रख देगी बिजली जल्वा-ए-दीदार की

जल्वा-ए-महबूब से ख़ाली न देखा दिल कोई
आइने हैं सैकड़ों और एक सूरत यार की

हो सुबुक-रफ़्तार कितनी ही नसीम-ए-सुब्ह-दम
आँख खुल जाती है फिर भी नर्गिस-ए-बीमार की

दुख़्तर-ए-रज़ ने दिए छींटे कुछ ऐसे साक़िया
पानी पानी हो गई तौबा हर इक मय-ख़्वार की

कुछ फले-फूले न ये नाज़ुक मज़ामीं ऐ 'जलील'
बे-खिले मुरझा गईं कलियाँ मिरे गुलज़ार की