उर्दू शायरी · ग़ज़ल

arsh-o-kursi pa kya KHuda milta

अर्श-ओ-कुर्सी प क्या ख़ुदा मिलता

عرش و کرسی پہ کیا خدا ملتا

शायर: Dagh Dehlvi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अर्श-ओ-कुर्सी प क्या ख़ुदा मिलता
आगे बढ़ते तो कुछ पता मिलता

ज़र मिला घर मिला ग़ुलाम मिला
मैं न मिलता तो तुम को क्या मिलता

ग़ैर से मिल के क्या लिया तुम ने
हम से मिलते तो कुछ मज़ा मिलता

आशिक़ी से मिलेगा ऐ ज़ाहिद
बंदगी से नहीं ख़ुदा मिलता

इक न इक हम लगाए रखते हैं
तुम न मिलते तो दूसरा मिलता

रोज़ इक दिल-लगी नई होती
रोज़ इक दिल मुझे नया मिलता

तुम को ये मिल गया है क़िस्मत से
'दाग़' सा वर्ना दूसरा मिलता