उर्दू शायरी · ग़ज़ल

apni qurbat ke sab aasar bhi lete jaana

अपनी क़ुर्बत के सब आसार भी लेते जाना

اپنی قربت کے سب آثار بھی لیتے جانا

शायर: Zaheer Ahmad7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अपनी क़ुर्बत के सब आसार भी लेते जाना
अब जो जाओ दर-ओ-दीवार भी लेते जाना

छोड़ कर जा ही रहे हो तो फिर अपने हमराह
साथ रहने का वो इक़रार भी लेते जाना

दुख तो होगा मगर एहसास हो कम-कम शायद
जाते जाते मिरा पिंदार भी लेते जाना

बे-ख़ुदी मुझ से मिरी छीन के जाने वाले
आगही के कड़े आज़ार भी लेते जाना

जश्न-ए-आज़ादी-ए-इज़हार में ऐ नग़्मागरो
मेरी ज़ंजीर की झंकार भी लेते जाना

उन से मिलने कभी जाओ तो ब-तर्ज़-ए-सौग़ात
मुझ से मिल कर मिरे अश'आर भी लेते जाना

बज़्म-ए-याराँ नहीं हाकिम की 'अदालत है 'ज़हीर'
सर पर ऊँची कोई दस्तार भी लेते जाना