उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aankhon mein hon sarab to kya kya dikhai de

आँखों में हों सराब तो क्या क्या दिखाई दे

آنکھوں میں ہوں سراب تو کیا کیا دکھائی دے

शायर: Zaheer Ahmad7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आँखों में हों सराब तो क्या क्या दिखाई दे
पानी के दरमियान भी सहरा दिखाई दे

बीनाई रख के देख मिरी अपनी आँख में
शायद तुझे भी दर्द की दुनिया दिखाई दे

दुनिया नहीं नुमाइश-ए-मेकानियात है
हर आदमी मशीन का पुर्ज़ा दिखाई दे

आदम ग़ुबार-ए-वक़्त में शायद बिखर गया
हव्वा ज़मीन-ए-रिज़्क़ पे तन्हा दिखाई दे

जिस इंक़लाब-ए-नूर का चर्चा है शहर में
मुझ को तो वो भी रात का हर्बा दिखाई दे

निकलो तो हर गली में अंधेरे का राज है
देखो तो कुछ घरों में उजाला दिखाई दे

शतरंज है सियासत-ए-दौराँ का खेल भी
हाकिम भी अपने तख़्त पे मोहरा दिखाई दे