उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ajib log the wo titliyan banate the

अजीब लोग थे वो तितलियाँ बनाते थे

عجیب لوگ تھے وہ تتلیاں بناتے تھے

शायर: Liaqat Jafri4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अजीब लोग थे वो तितलियाँ बनाते थे
समुंदरों के लिए सीपियाँ बनाते थे

वही बनाते थे लोहे को तोड़ कर ताला
फिर उस के बा'द वही चाबियाँ बनाते थे

मेरे क़बीले में ता'लीम का रिवाज न था
मिरे बुज़ुर्ग मगर तख़्तियाँ बनाते थे

फ़ुज़ूल वक़्त में वो सारे शीशागर मिल कर
सुहागनों के लिए चूड़ियाँ बनाते थे