उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ai falak chahiye ji-bhar ke nazara hum ko

ऐ फ़लक चाहिए जी-भर के नज़ारा हम को

اے فلک چاہیئے جی بھر کے نظارہ ہم کو

शायर: Dagh Dehlvi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ऐ फ़लक चाहिए जी-भर के नज़ारा हम को
जा के आना नहीं दुनिया में दोबारा हम को

कभी ईमा न किनाया न इशारा हम को
कम-निगाही ने तिरी जान से मारा हम को

हम किसी ज़ुल्फ़-ए-परेशाँ की तरह ऐ तक़दीर
ख़ूब बिगड़े थे मगर ख़ूब सँवारा हम को

जब खिंचे उन से हुए और ज़ियादा मुज़्तर
मरज़-ए-इश्क़ के परहेज़ ने मारा हम को

रोज़ तकरार करे कौन ख़रीदारों से
दिल की इस गर्मी-ए-बाज़ार ने मारा हम को

आप से अब न बनेगा कोई सौदा अपना
फेर दीजे दिल-ए-बेताब हमारा हम को

बहर-ए-हस्ती में हुए कश्ती-ए-तूफ़ानी हम
नहीं मिलता कहीं ऐ 'दाग़' किनारा हम को