उर्दू शायरी · ग़ज़ल

agar ghamon ka uThana bahut zaruri hai

अगर ग़मों का उठाना बहुत ज़रूरी है

اگر غموں کا اٹھانا بہت ضروری ہے

शायर: Raashidul Islaam Ansaarii7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अगर ग़मों का उठाना बहुत ज़रूरी है
तो फिर ये हँसना-हँसाना बहुत ज़रूरी है

ये हौसलों की कमी थी कि डर गए वर्ना
ग़मों को दूर भगाना बहुत ज़रूरी है

उदासियों का सफ़र तन्हा कट नहीं सकता
तिरा ख़याल भी आना बहुत ज़रूरी है

जो चाहते हो कि जन्नत तुम्हें सलाम करे
ख़फ़ा हो माँ तो मनाना बहुत ज़रूरी है

मुसाफ़िरों की दु'आ राएगाँ नहीं जाती
सड़क पे पेड़ लगाना बहुत ज़रूरी है

फ़क़त हिकायत-ए-हिज्र-ओ-विसाल कब है ग़ज़ल
ग़ज़ल से ज़ह्न जगाना बहुत ज़रूरी है

हवा में उड़ने के ये ख़्वाब छोड़िए 'राशिद'
ज़मीं पे पैर जमाना बहुत ज़रूरी है