उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aap be-kar ulajh baiThe hain taqdir ke sath

आप बे-कार उलझ बैठे हैं तक़दीर के साथ

آپ بے کار الجھ بیٹھے ہیں تقدیر کے ساتھ

शायर: Faisal Nadeem Faisal5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आप बे-कार उलझ बैठे हैं तक़दीर के साथ
पहले पढ़िए तो ज़रा सब्र को तफ़्सीर के साथ

मस्लहत है कि मोहब्बत है ग़ज़ब है जो है
देख दीवार उतर आई है तस्वीर के साथ

मुफ़्लिसी आ गई इस बार भी आड़े वर्ना
लाज़िमन फूल भी मिलते तुझे तहरीर के साथ

क्या ही अच्छा था शह-ए-वक़्त कि ऐसा होता
दुख फ़िलिस्तीं का भी होता तुझे कश्मीर के साथ

सूझता है कभी 'फ़ैसल' जो किनारा करना
लाख ख़दशात जनम लेते हैं तदबीर के साथ