नात लिरिक्स

Zarre Jhad Kar Teri Paizaron Ke

ज़र्रे झड़ कर तेरी पैज़ारों के

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: इमाम अहमद रज़ा ख़ानउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ज़र्रे झड़ कर तेरी पैज़ारों केताज-ए-सर बनते हैं सय्यारों के

हम से चोरों पे जो फ़रमाएँ करमख़िल'अत-ए-ज़र बनें पुश्तारों के

मेरे आक़ा का वो दर है जिस परमाथे घिस जाते हैं सरदारों के

मेरे 'ईसा ! तेरे सदक़े जाऊँतौर बे-तौर हैं बीमारों के

मुजरिमो ! चश्म-ए-तबस्सुम रक्खोफूल बन जाते हैं अंगारों के

तेरे अब्रू के तसद्दुक़ प्यारेबंद कर्रे हैं गिरिफ़्तारों के

जान-ओ-दिल तेरे क़दम पर वारेक्या नसीबे हैं तेरे यारों के

सिद्क़-ओ-'अदल-ओ-करम-ओ-हिम्मत मेंचार-सू शोहरे हैं इन चारों के

बहर-ए-तस्लीम-ए-'अली मैदाँ मेंसर झुके रहते हैं तलवारों के

कैसे आक़ाओं का बंदा हूँ, रज़ा !बोल-बाले मेरी सरकारों के

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