नात लिरिक्स

ज़ात पर उन की नाज़ाँ हैं अहल-ए-नज़र | ख़ूब-रू ख़ूब-सीरत हैं अख़्तर रज़ा | Zaat Par Un Ki Nazan Hain Ahl-e-Nazar | KHoob-roo KHoob-Seerat Hain Akhtar Raza

ज़ात पर उन की नाज़ाँ हैं अहल-ए-नज़र | ख़ूब-रू ख़ूब-सीरत हैं अख़्तर रज़ा | Zaat Par Un Ki Nazan Hain Ahl-e-Nazar | KHoob-roo KHoob-Seerat Hain Akhtar Raza

नात ख़्वान: सय्यिद हस्सानुल्लाह हुसैनी रहमानीशायर: मुहम्मद आसिम-उल-क़ादरी मुरादाबादीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ज़ात पर उन की नाज़ाँ हैं अहल-ए-नज़रख़ूब-रू, ख़ूब-सीरत हैं अख़्तर रज़ापैकर-ए-ज़ोहद-ओ-तक़्वा ज़माना कहेऔर ताज-ए-शरी'अत हैं अख़्तर रज़ा

जो हैं ख़ुद भी वली, जिन के वालिद वलीऐसे नाना कि है नाज़ तक़्वा को भीदादा हामिद रज़ा जिन का सानी नहींऔर गुल-ए-आ'ला-हज़रत हैं अख़्तर रज़ा

आए गुलशन में वो फूल खिलने लगेकोयल-ओ-क़ुमरी, मैना चहकने लगेडालियाँ, ग़ुंचा-ओ-गुल महकने लगेगुलशन-ओ-गुल की ज़ीनत हैं अख़्तर रज़ा

जो भी उन से जुड़ा, रौशनी मिल गईउस के ईमान को ताज़गी मिल गईमिट गई है ख़ुदी, बेख़ुदी मिल गईरहबर-ए-दीन-ओ-मिल्लत हैं अख़्तर रज़ा

वो मुसन्निफ़, मुहद्दिस, मुफ़क्किर भी हैंवो मुहक़्क़िक़, मुदब्बिर, मुफ़स्सिर भी हैंवो फ़क़ीह-ए-ज़माँ हैं, मुनाज़िर भी हैंऔर पीर-ए-तरीक़त हैं अख़्तर रज़ा

वो जो महफ़िल में आए समाँ बन गयाउन के नूरानी रुख़ से जो पर्दा उठाक्या 'अजम क्या 'अरब हर किसी ने कहाकिस-क़दर ख़ूबसूरत हैं अख़्तर रज़ा

उन के जैसा न पाओगे मुर्शिद यहाँछान लो चाहे तुम मिल के सारा जहाँफ़ख़्र-ए-अज़हर हैं वो, सुन्नियों की वो जाँऔर सरापा करामत हैं अख़्तर रज़ा

बात उन के जनाज़े की जब भी हुईअल्लाह अल्लाह ! हैराँ हुआ हर कोईदिल है जिन पर फ़िदा, 'आसिम-उल-क़ादरी !हाँ वोही प्यारे हज़रत हैं अख़्तर रज़ा

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